भूपेश-देवेंद्र की ‘गुटबाजी’ पर सिंहदेव का बड़ा बयान, बोले- कौन से परिवार में दो राय नहीं होती, अलग राय गुटबाजी नहीं

रायपुर/दुर्ग। कांग्रेस के संगठन सृजन प्रशिक्षण शिविर में शनिवार को पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने पार्टी की अंदरूनी राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया। भूपेश बघेल और देवेंद्र यादव के बीच कथित गुटबाजी के सवाल पर सिंहदेव ने इसे गुटबाजी मानने से इनकार करते हुए परिवार का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि एक ही परिवार में दो लोगों की राय अलग हो सकती है। इसे गुटबाजी नहीं कहा जा सकता।
सिंहदेव ने कहा कि भूपेश बघेल वरिष्ठ नेता हैं, जबकि देवेंद्र यादव युवा नेता हैं। दोनों पड़ोसी विधायक भी हैं। ऐसे में उम्र, अनुभव और राजनीतिक सोच के आधार पर दोनों की राय अलग हो सकती है। उन्होंने साफ कहा कि उनका समर्थन किसी व्यक्ति विशेष के साथ नहीं, बल्कि कांग्रेस पार्टी के साथ है।

‘भूपेश वरिष्ठ, देवेंद्र युवा… राय अलग होना स्वाभाविक’
सिंहदेव से जब भूपेश बघेल और देवेंद्र यादव के बीच राजनीतिक खींचतान और गुटबाजी को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं की उम्र और अनुभव में अंतर है। भूपेश बघेल वरिष्ठ नेता हैं और देवेंद्र यादव युवा नेता हैं।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग लोगों की राय अलग होना स्वाभाविक है। इसे सीधे गुटबाजी का नाम देना उचित नहीं होगा। जब सिंहदेव से पूछा गया कि भूपेश बघेल और देवेंद्र यादव में से वे किसके साथ हैं, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा- “मेरा समर्थन कांग्रेस के साथ है।”

‘कौन से परिवार में दो राय नहीं होती?’
कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति पर सिंहदेव ने परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि समाज की सबसे छोटी इकाई परिवार है और कौन से परिवार में दो राय नहीं होती?
उन्होंने कहा कि भाई-भाई के बीच भी अलग-अलग राय हो सकती है। पिता और पुत्र की सोच भी अलग हो सकती है। इसी तरह राजनीतिक दल में भी नेताओं के बीच विचारों का अंतर होना असामान्य नहीं है।

सिंहदेव ने कहा कि असली कोशिश यह होनी चाहिए कि विचारों की भिन्नता से पार्टी के हित को कम से कम नुकसान हो। सभी नेताओं को संगठन को मजबूत करने की दिशा में मिलकर काम करना चाहिए।
बीजेपी पर भी सिंहदेव का पलटवार
कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को लेकर बीजेपी द्वारा किए जा रहे हमलों पर भी सिंहदेव ने पलटवार किया। उन्होंने बीजेपी नेताओं से कहा कि कांग्रेस पर सवाल उठाने से पहले वे बृजमोहन अग्रवाल के पत्रों का जवाब दें।
सिंहदेव ने कहा कि बृजमोहन अग्रवाल मुख्यमंत्री को कितने पत्र लिख चुके हैं, बीजेपी को इसका जवाब देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर बृजमोहन अग्रवाल को कितनी घुटन महसूस हुई कि उन्हें अपनी बात पत्र के माध्यम से सार्वजनिक करनी पड़ी।
सिंहदेव का यह बयान ऐसे समय आया है जब छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संगठन को लेकर लगातार बैठकों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का दौर चल रहा है।
‘घर की बात है, पार्टी को नुकसान नहीं होना चाहिए’
सिंहदेव ने कांग्रेस के भीतर मतभेदों को लेकर कहा कि यह घर की बात है। अलग-अलग राय होना कोई असामान्य बात नहीं है। जरूरी यह है कि इन मतभेदों का असर पार्टी के संगठन और राजनीतिक हित पर नहीं पड़े।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर संगठन को मजबूत करने के लिए काम करना चाहिए।
307 ब्लॉक अध्यक्षों को संगठन की ट्रेनिंग
दरअसल, कांग्रेस की ओर से 5 से 7 सितंबर तक दुर्ग में तीन दिवसीय संगठन सृजन प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जा रहा है। इस शिविर में ब्लॉक अध्यक्षों और मास्टर ट्रेनर्स को संगठन को मजबूत करने के साथ बूथ स्तर तक पार्टी की गतिविधियों को प्रभावी बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है।
प्रशिक्षण में संगठन संचालन, बूथ स्तर की रणनीति, सोशल मीडिया के इस्तेमाल और कांग्रेस की नीतियों को आम लोगों तक पहुंचाने जैसे विषयों पर फोकस किया जा रहा है।
कांग्रेस ने प्रदेश के 307 ब्लॉक अध्यक्षों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण देने की योजना बनाई है। पार्टी का लक्ष्य चुनाव के समय अचानक सक्रिय होने के बजाय अभी से ब्लॉक से लेकर बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना है।
सिंहदेव के बयान के सियासी मायने
टीएस सिंहदेव का बयान ऐसे वक्त आया है जब छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नेतृत्व और संगठन को लेकर अलग-अलग नेताओं की सक्रियता लगातार चर्चा में है। भूपेश बघेल और देवेंद्र यादव को लेकर पूछे गए सवाल पर सिंहदेव ने किसी एक खेमे का पक्ष लेने के बजाय खुद को सीधे पार्टी के साथ जोड़ा।
उनका “मेरा समर्थन कांग्रेस के साथ है” वाला बयान साफ संकेत देता है कि वे व्यक्तिगत खेमेबंदी के बजाय संगठनात्मक एकजुटता पर जोर देना चाहते हैं।
वहीं, बृजमोहन अग्रवाल के पत्रों का मुद्दा उठाकर सिंहदेव ने बीजेपी के कांग्रेस पर किए जा रहे हमलों का जवाब भी दे दिया। अब सिंहदेव के इस बयान को छत्तीसगढ़ की सियासत में कांग्रेस के भीतर चल रही कथित खींचतान के बीच एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।









